आरती: श्री महावीर भगवान | जय सन्मति देवा (Shri Mahaveer Bhagwan 3 Jai Sanmati Deva)

जय सन्मति देवा,

प्रभु जय सन्मति देवा।

वर्द्धमान महावीर वीर अति,

जय संकट छेवा ॥

॥ऊँ जय सन्मति देवा...॥



सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे,

त्रिशला के जाये ।

कुण्डलपुर अवतार लिया,

प्रभु सुर नर हर्षाये ॥

॥ऊँ जय सन्मति देवा...॥



देव इन्द्र जन्माभिषेक कर,

उर प्रमोद भरिया ।

रुप आपका लख नहिं पाये,

सहस आंख धरिया ॥

॥ऊँ जय सन्मति देवा...॥



जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये,

घर में बाल यती ।

राजपाट ऐश्वर्य छोड़ सब,

ममता मोह हती ॥

॥ऊँ जय सन्मति देवा...॥



बारह वर्ष छद्मावस्था में,

आतम ध्यान किया।

घाति-कर्म चूर-चूर,

प्रभु केवल ज्ञान लिया ॥

॥ऊँ जय सन्मति देवा...॥



पावापुर के बीच सरोवर,

आकर योग कसे ।

हने अघातिया कर्म शत्रु सब,

शिवपुर जाय बसे ॥

॥ऊँ जय सन्मति देवा...॥



भूमंडल के चांदनपुर में,

मंदिर मध्य लसे ।

शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी,

दर्शन पाप नसे ॥

॥ऊँ जय सन्मति देवा...॥



करुणासागर करुणा कीजे,

आकर शरण गही।

दीन दयाला जगप्रतिपाला,

आनन्द भरण तु ही ॥

॥ऊँ जय सन्मति देवा...॥



जय सन्मति देवा,

प्रभु जय सन्मति देवा।

वर्द्धमान महावीर वीर अति,

जय संकट छेवा ॥



जय सन्मति देवा,

प्रभु जय सन्मति देवा।

वर्द्धमान महावीर वीर अति,

जय संकट छेवा ॥








आरती: ॐ जय महावीर प्रभु
|
आरती: ॐ जय महावीर प्रभु - जगनायक सुखदायक

छठ पूजा: पहिले पहिल, छठी मईया व्रत तोहार। (Chhath Puja: Pahile Pahil Chhathi Maiya)

श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग उत्पत्ति पौराणिक कथा (Shri Nageshwar Jyotirlinga Utpatti Pauranik Katha)

कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 5 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 5)

होली खेल रहे नंदलाल: होली भजन (Holi Bhajan: Holi Khel Rahe Nandlal)

मेरी आखिओं के सामने ही रहना: भजन (Meri Akhion Ke Samne Hi Rehina Oh Shero Wali Jagdambe)

मंत्र: महामृत्युंजय मंत्र, संजीवनी मंत्र, त्रयंबकम मंत्र (Mahamrityunjay Mantra)

पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 21 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 21)

भजन: ना जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं! (Na Jane Kaun Se Gun Par Dayanidhi Reejh Jate Hain)

मैं तो बांके की बांकी बन गई (Main Toh Banke Ki Banki Ban Gayi)

पतिव्रता सती माता अनसूइया की कथा (Pativrata Sati Mata Ansuiya Ki Katha)

श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती (Mata Shri Chintpurni Devi)

कार्तिक मास माहात्म्य कथा: अध्याय 11 (Kartik Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 11)