हे माँ मुझको ऐसा घर दे: भजन (He Maa Mujhko Aisa Ghar De)

हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जिसमे तुम्हारा मंदिर हो,

ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो।

हे माँ, हे माँ, हे माँ, हे माँ,

जय जय माँ, जय जय माँ।



इक कमरा जिसमे तुम्हारा आसन माता सजा रहे,

हर पल हर छिन भक्तो का वहां आना जान लगा रहे।

छोटे बड़े का माँ उस घर में एक सामान ही आदर हो,

ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो॥

॥ हे माँ मुझको ऐसा घर दे...॥



इस घर से कोई भी खाली कभी सवाली जाए ना,

चैन ना पाऊं तब तक दाती जब तक चैन वो पाए ना।

मुझको दो वरदान दया का, तुम तो दया का सागर हो,

ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो॥



हे माँ मुझको ऐसा घर दे, जिसमे तुम्हारा मंदिर हो,

ज्योत जगे दिन रैन तुम्हारी, तुम मंदिर के अन्दर हो।

हे माँ, हे माँ, हे माँ, हे माँ,

जय जय माँ, जय जय माँ।

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार - भजन (Ab Saump Diya Is Jeevan Ka Sab Bhar Tumhare Hathon Me)

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी: भजन (Darshan Do Ghansyam Nath Mori Akhiyan Pyasi Re)

होली भजन: फाग खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद किशोर (Holi Bhajan: Faag Khelan Barasane Aaye Hain Natwar Nand Kishore)

भजन: राधे कृष्ण की ज्योति अलोकिक (Radhe Krishna Ki Jyoti Alokik)

पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 9 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 9)

हो लाल मेरी पत रखियो बला - दमादम मस्त कलन्दर: भजन (O Lal Meri Pat Rakhiyo Bala Duma Dum Mast Kalandar)

भजन: ज्योत से ज्योत जगाते चलो.. (Bhajan: Jyot Se Jyot Jagate Chalo)

गुरु स्तुति (Guru Stuti)

श्री सत्यनारायण कथा - तृतीय अध्याय (Shri Satyanarayan Katha Tritiya Adhyay)

तू शब्दों का दास रे जोगी: भजन (Tu Sabdon Ka Das Re Jogi)

पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 10 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 10)

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा (Varuthini Ekadashi Vrat Katha)