हरि नाम नहीं तो जीना क्या: भजन (Hari Nam Nahi Too Jeena Kya)

हरि नाम नहीं तो जीना क्या

अमृत है हरि नाम जगत में,

इसे छोड़ विषय विष पीना क्या॥



काल सदा अपने रस डोले,

ना जाने कब सर चढ़ बोले।

हर का नाम जपो निसवासर,

अगले समय पर समय ही ना॥

॥ हरि नाम नहीं...॥



भूषन से सब अंग सजावे,

रसना पर हरि नाम ना लावे।

देह पड़ी रह जावे यही पर,

फिर कुंडल और नगीना क्या॥

॥ हरि नाम नहीं...॥



तीरथ है हरि नाम तुम्हारा,

फिर क्यूँ फिरता मारा मारा।

अंत समय हरि नाम ना आवे,

फिर काशी और मदीना क्या॥

॥ हरि नाम नहीं...॥



हरि नाम नहीं तो जीना क्या

अमृत है हरि नाम जगत में,

इसे छोड़ विषय विष पीना क्या॥

भजन: ज्योत से ज्योत जगाते चलो.. (Bhajan: Jyot Se Jyot Jagate Chalo)

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि। (Gananaykay Gandevatay Ganadhyakshay Dheemahi)

श्री गौ अष्टोत्तर नामावलि - गौ माता के 108 नाम (Gau Mata Ke 108 Naam)

मेरी आखिओं के सामने ही रहना: भजन (Meri Akhion Ke Samne Hi Rehina Oh Shero Wali Jagdambe)

रोहिणी शकट भेदन, दशरथ रचित शनि स्तोत्र कथा (Rohini Shakat Bhed Dasharath Rachit Shani Stotr Katha)

भजन: गणपति आज पधारो, श्री रामजी की धुन में (Ganapati Aaj Padharo Shri Ramaji Ki Dhun Me)

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए: भजन (Bheja Hai Bulava Tune Shera Waliye)

परमा एकादशी व्रत कथा (Parama Ekadashi Vrat Katha)

राम नाम सुखदाई, भजन करो भाई! (Ram Naam Sukhdai Bhajan Karo Bhai Yeh Jeevan Do Din Ka)

भजन: सत्संगति से प्यार करना सीखोजी! (Bhajan: Sat Sangati Se Pyar Karana Sikho Ji)

पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 24 (Purushottam Mas Mahatmya Katha: Adhyaya 24)

वो कौन है जिसने हम को दी पहचान है (Wo Kon Hai Jisne Humko Di Pahachan Hai)