भूलकर भी 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक दिन में ना सोएं, इसके साथ ही ध्यान में रखें ये 4 बातें

याद रखे ये 4 बातें

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का उपयुक्त महिना:


मान्यता है कि जो भी व्यक्ति वैशाख के महीने में सूर्योदय से पहले जागकर स्नान करता है और व्रत रखता है, उससे भगवान विष्णु हमेशा प्रसन्न रहते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें इस बार वैशाख महीने की शुरुआत 1 अप्रैल 2018 यानी रविवार के दिन से हुई है जो 30 अप्रैल तक चलेगा। यह पूरा महिना भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए उपयुक्त है। इस महीने में आप आसानी से भगवान विष्णु को प्रसन्न करके अपने मन की मुरादों को पूरी कर सकते हैं। हालाँकि इस महीने में कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक होता है।

वैशाख महीने का धार्मिक महत्व:


स्कन्द पुराण के अनुसार प्राचीनकाल में महीरथ नाम का राजा था। उसनें केवल वैशाख महीने में स्नान करके ही वैकुण्ठ को प्राप्त कर लिया था। इस महीने में जो भी व्यक्ति व्रत करता है, उसे प्रतिदिन सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी, तालाब या कुएं पर जाकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद सूर्यदेव को इस मंत्र के साथ जल अर्पित करें। मंत्र: वैशाखे मेषगे भानौ प्रात: स्नानपरायण:। अर्ध्य तेहं प्रदास्यामि गृहाण मधुसूदन।।

वैशाख के महीने में ध्यान में रखें ये बातें:


*- इस महीने में वैशाख व्रत महात्म्य की कथा सुननी चाहिए, इसके साथ ही ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः के मंत्र का जाप भी करना चाहिए। *- व्रत करने वाले व्यक्ति को केवल एक समय भोजन करना चाहिए। *- वैशाख के महीने में जल दान का विशेष महत्व होता है, इसलिए इसी महीने में जगह-जगह प्याऊ की स्थापना भी करवाएं। *- इस महीने में पंखा, खरबूजा, अन्य फल और अनाजों का दान करना चाहिए। *- स्कन्द पुराण के अनुसार इस महीने में कुछ चीजें वर्जित हैं, जिन्हें करने से व्यक्ति को बचना चाहिए। इस महीने में तेल लगाना, दिन में सोना, कांसे के बर्तन में भोजन ग्रहण करना, दो बार भोजन करना और रात में खाना भूलकर भी नहीं खाना चाहिए।

वैशाख के महीने में इस मन्त्र से करनी चाहिए भगवान विष्णु की पूजा:


हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार सूर्य के मेष राशि में आने पर भगवान विष्णु के लिए वैशाख महीने में स्नान और व्रत करना चाहिए। स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान् विष्णु की इस मंत्र से प्रार्थना करें। मंत्र: मधुसूदन देवेश वैशाखे मेषगे रवौ। प्रात:स्नानं करिष्यामि निर्विघ्नं कुरु माधव।। अर्थ: हे मधुसूदन। मैं मेष राशि में सूर्य के स्थित होने पर वैशाख मास में प्रात:स्नान करुंगा, आप इसे निर्विघ्न पूर्ण कीजिए। इसके बाद निम्न मंत्र बोलते हुए जल अर्पित करें: वैशाखे मेषगे भानौ प्रात:स्नानपरायण:। अर्ध्य तेहं प्रदास्यामि गृहाण मधुसूदन।।

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